top of page
All Posts


श्री कुंज बिहारी की आरती
आरती कुंजबिहारी की, श्री गिरिधर कृष्णमुरारी की ॥ गले में बैजंती माला, बजावै मुरली मधुर बाला। श्रवण में कुण्डल झलकाला, नंद के आनंद नंदलाला। गगन सम अंग कांति काली, राधिका चमक रही आली । लतन में ठाढ़े बनमाली;भ्रमर सी अलक, कस्तूरी तिलक, चंद्र सी झलक;ललित छवि श्यामा प्यारी की ॥ श्री गिरिधर कृष्णमुरारी की... कनकमय मोर मुकुट बिलसै, देवता दरसन को तरसैं । गगन सों सुमन रासि बरसै;बजे मुरचंग, मधुर मिरदंग, ग्वालिन संग;अतुल रति गोप कुमारी की ॥ श्री गिरिधर कृष्णमुरारी की... जहां ते प्रकट भई ग
mohit goswami
Jan 42 min read


श्री कृष्ण जी की आरती
ॐ जय श्री कृष्ण हरे, प्रभु जय श्री कृष्ण हरे भक्तन के दुख टारे पल में दूर करे. जय जय श्री कृष्ण हरे.... परमानन्द मुरारी मोहन गिरधारी. जय रस रास बिहारी जय जय गिरधारी. जय जय श्री कृष्ण हरे.... कर कंचन कटि कंचन श्रुति कुंड़ल माला मोर मुकुट पीताम्बर सोहे बनमाला. जय जय श्री कृष्ण हरे.... दीन सुदामा तारे, दरिद्र दुख टारे. जग के फ़ंद छुड़ाए, भव सागर तारे. जय जय श्री कृष्ण हरे.... हिरण्यकश्यप संहारे नरहरि रुप धरे. पाहन से प्रभु प्रगटे जन के बीच पड़े. जय जय श्री कृष्ण हरे.... केशी कंस
mohit goswami
Jan 42 min read


श्री शिव जी की आरती
कर्पूरगौरं करुणावतारं संसारसारं भुजगेन्द्रहारं । सदा वसन्तं ह्रदयाविन्दे भंव भवानी सहितं नमामि ॥ जय शिव ओंकारा हर ॐ शिव ओंकारा । ब्रम्हा विष्णु सदाशिव अद्धांगी धारा ॥ ॐ जय शिव ओंकारा...... एकानन चतुरानन पंचांनन राजे । हंसासंन, गरुड़ासन, वृषवाहन साजे॥ ॐ जय शिव ओंकारा...... दो भुज चारु चतुर्भज दस भुज अति सोहें । तीनों रुप निरखता त्रिभुवन जन मोहें॥ ॐ जय शिव ओंकारा...... अक्षमाला, बनमाला, रुण्ड़मालाधारी । चंदन, मृदमग सोहें, भाले शशिधारी ॥ ॐ जय शिव ओंकारा...... श्वेताम्बर, पीताम्बर,
mohit goswami
Jan 42 min read


श्री हनुमान जी की आरती
आरती कीजे हनुमान लला की । दुष्ट दलन रघुनाथ कला की ॥ जाके बल से गिरवर काँपे । रोग दोष जाके निकट ना झाँके ॥ अंजनी पुत्र महा बलदाई । संतन के प्रभु सदा सहाई ॥ दे वीरा रघुनाथ पठाये । लंका जाये सिया सुधी लाये ॥ लंका सी कोट संमदर सी खाई । जात पवनसुत बार न लाई ॥ लंका जारि असुर संहारे । सियाराम जी के काज सँवारे ॥ लक्ष्मण मुर्छित पडे सकारे । आनि संजीवन प्राण उबारे ॥ पैठि पताल तोरि जम कारे। अहिरावन की भुजा उखारे ॥ बायें भुजा असुर दल मारे । दाहीने भुजा सब संत जन उबारे ॥ सुर नर मुनि जन आर
mohit goswami
Jan 42 min read


श्री रामचन्द्र जी की आरती
श्री रामचन्द्र कृपालु भजु मन हरण भवभय दारुणं । नवकंज लोचन, कंजमुख, करकुंज, पदकंजारुणं ।। श्री रामचन्द्र कृपालु भजु मन हरण भवभय दारुणं । श्री राम श्री राम.... कंदर्प अगणित अमित छबि, नवनीलनीरद सुन्दरं । पट पीत मानहु तडीत रुचि शुचि नौमि जनक सुतावरं ।। श्री रामचन्द्र कृपालु भजु मन हरण भवभय दारुणं । श्री राम श्री राम.... भजु दीनबंधु दिनेश दानवदै त्यवंशनिकंदनं । रघुनंद आंनदकंद कोशलचंद दशरथनंदनं ।। श्री रामचन्द्र कृपालु भजु मन हरण भवभय दारुणं । श्री राम श्री राम... सिर मुकुट कूंडल
mohit goswami
Jan 42 min read


श्री सत्यानारयण जी की आरती
ॐ जय लक्ष्मीरमणा स्वामी जय लक्ष्मीरमणा । सत्यनारायण स्वामी, जन पातक हरणा रत्नजडित सिंहासन, अद्भुत छवि राजें । नारद करत निरतंर घंटा ध्वनी बाजें ॥ ॐ जय लक्ष्मीरमणा स्वामी.... प्रकट भयें कलिकारण, द्विज को दरस दियो । बूढों ब्राम्हण बनके, कंचन महल कियों ॥ ॐ जय लक्ष्मीरमणा स्वामी..... दुर्बल भील कठार, जिन पर कृपा करी । च्रंदचूड एक राजा तिनकी विपत्ति हरी ॥ ॐ जय लक्ष्मीरमणा स्वामी..... वैश्य मनोरथ पायों, श्रद्धा तज दिन्ही । सो फल भोग्यों प्रभूजी, फेर स्तुति किन्ही ॥ ॐ जय लक्ष्मीरमणा
mohit goswami
Jan 42 min read


श्री मायातीत विष्णु जी की आरती
श्री मायातीत विष्णु जी की आरती जय जगदीश हरे, प्रभु! जय जगदीश हरे। मायातीत, महेश्वर मन-वच-बुद्धि परे॥ जय जगदीश हरे आदि, अनादि, अगोचर, अविचल, अविनाशी। अतुल, अनन्त, अनामय, अमित, शक्ति-राशि॥ जय जगदीश हरे अमल, अकल, अज, अक्षय, अव्यय, अविकारी। सत-चित-सुखमय, सुन्दर शिव सत्ताधारी॥ जय जगदीश हरे विधि-हरि-शंकर-गणपति-सूर्य-शक्तिरूपा। विश्व चराचर तुम ही, तुम ही विश्वभूपा॥ जय जगदीश हरे माता-पिता-पितामह-स्वामि-सुहृद्-भर्ता। विश्वोत्पादक पालक रक्षक संहर्ता॥ जय जगदीश हरे साक्षी, शरण, सखा, प्रि
mohit goswami
Jan 42 min read


श्री हरि विष्णु जी की आरती
श्री हरि विष्णु जी की आरती ॐ जय जगदीश हरे, प्रभु! जय जगदीश हरे। भक्तजनों के संकट, छन में दूर करे॥ ॐ जय जगदीश हरे जो ध्यावै फल पावै, दु:ख बिनसै मनका। सुख सम्पत्ति घर आवै, कष्ट मिटै तनका॥ ॐ जय जगदीश हरे मात-पिता तुम मेरे, शरण गहूँ किसकी। तुम बिन और न दूजा, आस करूँ जिसकी॥ ॐ जय जगदीश हरे तुम पूरन परमात्मा, तुम अंतर्यामी। पार ब्रह्म परमेश्वर, तुम सबके स्वामी॥ ॐ जय जगदीश हरे तुम करुणा के सागर, तुम पालनकर्ता। मैं मुरख खल कामी, कृपा करो भर्ता॥ ॐ जय जगदीश हरे तुम हो एक अगोचर, सबके प्र
mohit goswami
Jan 42 min read


श्री गणेश जी की आरती | Ganesh Ji Ki Arti
गणेश जी की आरती “ॐ श्री गणेशाय नमः। वक्रतुंड महाकाय, सूर्यकोटि समप्रभ। निर्विघ्नं कुरु मे देव, सर्वकार्येषु सर्वदा॥” जय गणेश, जय गणेश, जय गणेश देवा।माता जाकी पार्वती, पिता महादेवा॥जय गणेश, जय गणेश, जय गणेश देवा।माता जाकी पार्वती, पिता महादेवा॥ एकदन्त, दयावन्त, चार भुजा धारी।माथे पर तिलक सोहे, मूषक की सवारी॥जय गणेश, जय गणेश, जय गणेश देवा।माता जाकी पार्वती, पिता महादेवा॥ अंधन को आँख देत, कोढ़िन को काया।बाँझन को पुत्र देत, निर्धन को माया॥जय गणेश, जय गणेश, जय गणेश देवा।माता जाकी
Sonu Sir
Dec 19, 20253 min read
bottom of page