श्री कृष्ण जी की आरती
- mohit goswami
- Jan 4
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ॐ जय श्री कृष्ण हरे, प्रभु जय श्री कृष्ण हरे
भक्तन के दुख टारे पल में दूर करे.
जय जय श्री कृष्ण हरे....
परमानन्द मुरारी मोहन गिरधारी.
जय रस रास बिहारी जय जय गिरधारी.
जय जय श्री कृष्ण हरे....
कर कंचन कटि कंचन श्रुति कुंड़ल माला
मोर मुकुट पीताम्बर सोहे बनमाला.
जय जय श्री कृष्ण हरे....
दीन सुदामा तारे, दरिद्र दुख टारे.
जग के फ़ंद छुड़ाए, भव सागर तारे.
जय जय श्री कृष्ण हरे....
हिरण्यकश्यप संहारे नरहरि रुप धरे.
पाहन से प्रभु प्रगटे जन के बीच पड़े.
जय जय श्री कृष्ण हरे....
केशी कंस विदारे नर कूबेर तारे.
दामोदर छवि सुन्दर भगतन रखवारे.
जय जय श्री कृष्ण हरे....
काली नाग नथैया नटवर छवि सोहे.
फ़न फ़न चढ़त ही नागन, नागन मन मोहे.
जय जय श्री कृष्ण हरे....
राज्य विभिषण थापे सीता शोक हरे.
द्रुपद सुता पत राखी करुणा लाज भरे.
जय जय श्री कृष्ण हरे....
ॐ जय श्री कृष्ण हरे.

श्री कृष्ण जी की आरती – प्रेम, भक्ति और आनंद का उत्सव
जब मन बोझिल हो जाए और जीवन नीरस लगने लगे, तब श्री कृष्ण जी की आरती हृदय में प्रेम और उल्लास का संचार कर देती है। कान्हा की आरती केवल पूजा नहीं, बल्कि आत्मा का मुस्कुराना है — जहाँ भक्ति में आनंद और समर्पण में मधुरता बस जाती है।
मुरली की मधुर कल्पना के साथ जब दीप प्रज्वलित होता है, तो ऐसा लगता है मानो स्वयं श्रीकृष्ण मुस्कुराते हुए पास आ गए हों। आरती की हर पंक्ति हमें यह सिखाती है कि जीवन के युद्ध में भी प्रेम और धर्म का मार्ग नहीं छोड़ना चाहिए।
श्री कृष्ण जी की आरती हमें याद दिलाती है कि ईश्वर कठोर नहीं, बल्कि सखा हैं — जो गिरते हुए को संभालते हैं और भ्रम में पड़े मन को गीता का ज्ञान देते हैं। बाल गोपाल की चंचलता हो या द्वारकाधीश की गंभीरता, हर रूप में वे भक्त के हृदय में वास करते हैं।
जो श्रद्धा और प्रेम से श्री कृष्ण जी की आरती करता है, उसके जीवन में संतुलन, सकारात्मकता और आनंद बना रहता है।जहाँ कृष्ण का नाम है,वहाँ चिंता नहीं — केवल विश्वास और प्रेम है।यही श्री कृष्ण जी की आरती की दिव्यता है।



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