श्री रामचन्द्र जी की आरती
- mohit goswami
- Jan 4
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श्री रामचन्द्र कृपालु भजु मन हरण भवभय दारुणं ।
नवकंज लोचन, कंजमुख, करकुंज, पदकंजारुणं ।।
श्री रामचन्द्र कृपालु भजु मन हरण भवभय दारुणं ।
श्री राम श्री राम....
कंदर्प अगणित अमित छबि, नवनीलनीरद सुन्दरं ।
पट पीत मानहु तडीत रुचि शुचि नौमि जनक सुतावरं ।।
श्री रामचन्द्र कृपालु भजु मन हरण भवभय दारुणं ।
श्री राम श्री राम....
भजु दीनबंधु दिनेश दानवदै त्यवंशनिकंदनं ।
रघुनंद आंनदकंद कोशलचंद दशरथनंदनं ।।
श्री रामचन्द्र कृपालु भजु मन हरण भवभय दारुणं ।
श्री राम श्री राम...
सिर मुकुट कूंडल तिलक चारु उदारु अंग विभुषणं ।
आजानु भुजा शरा चाप धरा, संग्राम जित खर दुषणं ।।
भुजा शरा चाप धरा, संग्राम जित खर दुषणं ।।
श्री रामचन्द्र कृपालु भजु मन हरण भवभय दारुणं
इति वदित तुलसीदास शंकरशेषमुनिमनरंजनं ।
मम ह्रदयकंजनिवास कुरु, कमदि खल दल गंजनं । ।
श्री रामचन्द्र कृपालु भजु मन हरण भवभय दारुणं ।
नवकंज लोचन, कंजमुख, करकुंज, पदकंजारुणं ।।
श्री राम श्री राम...

श्री रामचन्द्र जी की आरती – मर्यादा, भक्ति और विश्वास का प्रकाश
जब मन जीवन की उलझनों से थक जाता है, तब श्री रामचन्द्र जी की आरती दिल को असीम शांति और साहस प्रदान करती है। प्रभु श्रीराम केवल एक अवतार नहीं, बल्कि मर्यादा, त्याग और सत्य के जीवंत स्वरूप हैं। उनकी आरती करते समय ऐसा लगता है जैसे मन स्वयं धर्म के चरणों में झुक गया हो।
आरती की हर पंक्ति हमें याद दिलाती है कि जीवन में कठिनाइयाँ आएँगी, पर यदि मार्ग सही हो तो विजय निश्चित है। दीपक की लौ में प्रभु राम का तेज़ दिखाई देता है, जो अंधकार से नहीं डरता, बल्कि उसे मिटाने की शक्ति देता है।
श्री रामचन्द्र जी की आरती सिर्फ़ पूजा नहीं, बल्कि आचरण का पाठ है। यह हमें सिखाती है कि पुत्र, पति, राजा और मानव — हर भूमिका में धर्म को सर्वोपरि कैसे रखा जाए। सच्ची भक्ति वही है जो व्यवहार में भी झलके।
जो भक्त श्रद्धा से प्रभु राम की आरती करता है, उसके जीवन में संयम, धैर्य और आत्मबल स्वतः प्रकट होता है।जहाँ राम का नाम है,वहाँ भय नहीं — केवल विश्वास है।यही श्री रामचन्द्र जी की आरती की दिव्यता है।



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