श्री सीता जी की आरती
सीता विराजित मिथिलाधाम सब मिल कर करें आरती।
संग सुशोभित लछुमन-राम सब मिल कर करें आरती।।
विपदा विनाशिनि सुखदा चराचर, सीता धिया बनि आयीं सुनयना घर।
मिथिला के महिमा महान...सब मिल कर करें आरती।। सीता विराजित ...
सीता सर्वेश्वरि ममता सरोवर, बायाँ कमल कर दायाँ अभय वर।
सौम्या सकल गुणधाम.....सब मिल कर करें आरती।। सीता विराजित ...
रामप्रिया सर्वमंगल दायिनि, सीता सकल जगती दुःखहारिणि।
करें सबका कल्याण...सब मिल कर करें आरती।। सीता विराजित ...
सीता-राम की जोड़ी अतिभावन, नैहर सासुर किया पावन
सेवक हैं हनुमान...सब मिल कर करें आरती।। सीता विराजित ...
ममतामयी माता सीता पुनीता, संतन हेतु सीता सदा सुनीता
धरणी-सुता सब ठाम...सब मिल कर करें आरती ।। सीता विराजित ...
शुक्ल नवमी तिथि वैशाख मासे, ’चंद्रमणि’ सीता उत्सव हुलासे
पाय सकल सुखधाम...सब मिल कर करें आरती।।
सीता विराजित मिथिलाधाम सब मिल कर करें आरती।।।

सहनशीलता, पवित्रता और नारी गरिमा का प्रतीक
जब जीवन में धैर्य, मर्यादा और आंतरिक शक्ति की आवश्यकता होती है, तब श्री सीता जी की आरती मन को गहन शांति और संबल प्रदान करती है। माता सीता केवल एक पात्र नहीं, बल्कि त्याग, सत्य और आत्मसम्मान की जीवंत मिसाल हैं।
आरती के समय जलता हुआ दीप उनके उस उज्ज्वल चरित्र का प्रतीक बन जाता है, जिसने हर परीक्षा को मौन साहस के साथ स्वीकार किया। सीता जी का स्मरण हमें यह सिखाता है कि सच्ची शक्ति शोर में नहीं, बल्कि धैर्य और आत्मविश्वास में होती है।
श्री सीता जी की आरती हमें नारी की उस गरिमा का बोध कराती है, जो परिस्थितियों से टूटती नहीं, बल्कि उन्हें धर्म और मर्यादा के साथ पार करती है। वे प्रेम भी हैं, तप भी हैं और न्याय के लिए खड़ा होने का साहस भी।
जो श्रद्धा और निर्मल भाव से श्री सीता जी की आरती करता है, उसके जीवन में शांति, संयम और संबंधों में पवित्रता बनी रहती है।जहाँ सीता माता का आदर्श है,वहाँ जीवन में मर्यादा स्वयं मार्ग दिखाती है।यही श्री सीता जी की आरती की सच्ची महिमा है।



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