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श्री काली माता की आरती

Jan 4
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मंगल की सेवा सुन मेरी देवा, हाथ जोड तेरे द्वार खडे।


पान सुपारी ध्वजा नारियल ले ज्वाला तेरी भेट धरेसुन।।1।।


जगदम्बे न कर विलम्बे, संतन के भडांर भरे।


सन्तन प्रतिपाली सदा खुशहाली, जै काली कल्याण करे ।।2।।


बुद्धि विधाता तू जग माता, मेरा कारज सिद्व रे।


चरण कमल का लिया आसरा शरण तुम्हारी आन पडे।।3।।


जब जब भीड पडी भक्तन पर, तब तब आप सहाय करे।


गुरु के वार सकल जग मोहयो, तरूणी रूप अनूप धरेमाता।।4।।


होकर पुत्र खिलावे, कही भार्या भोग करेशुक्र सुखदाई सदा।


सहाई संत खडे जयकार करे ।।5।।


ब्रह्मा विष्णु महेश फल लिये भेट तेरे द्वार खडेअटल सिहांसन।


बैठी मेरी माता, सिर सोने का छत्र फिरेवार शनिचर।।6।।


कुकम बरणो, जब लकड पर हुकुम करे ।


खड्ग खप्पर त्रिशुल हाथ लिये, रक्त बीज को भस्म करे।।7।।


शुम्भ निशुम्भ को क्षण मे मारे, महिषासुर को पकड दले ।


आदित वारी आदि भवानी, जन अपने को कष्ट हरे ।।8।।


कुपित होकर दनव मारे, चण्डमुण्ड सब चूर करे।


जब तुम देखी दया रूप हो, पल मे सकंट दूर करे।।9।।


सौम्य स्वभाव धरयो मेरी माता, जन की अर्ज कबूल करे ।


सात बार की महिमा बरनी, सब गुण कौन बखान करे।।10


सिंह पीठ पर चढी भवानी, अटल भवन मे राज्य करे।


दर्शन पावे मंगल गावे, सिद्ध साधक तेरी भेट धरे ।।11।।


ब्रह्मा वेद पढे तेरे द्वारे, शिव शंकर हरी ध्यान धरे।


इन्द्र कृष्ण तेरी करे आरती, चॅवर कुबेर डुलाय रहे।।12।।


जय जननी जय मातु भवानी, अटल भवन मे राज्य करे।


सन्तन प्रतिपाली सदा खुशहाली, मैया जै काली कल्याण करे।।13।।



अंधकार में प्रकट होती शक्ति

जब जीवन में भय, अन्याय और भीतर का अंधकार बढ़ने लगता है, तब श्री काली माता की आरती उस शक्ति का आह्वान करती है जो हर बुराई का अंत करती है। काली माता केवल उग्र रूप नहीं, बल्कि सत्य, समय और मुक्त चेतना की प्रतीक हैं।

आरती के समय जलता हुआ दीप यह दर्शाता है कि अज्ञान और अहंकार कितना भी गहरा क्यों न हो, माता की शक्ति उसे क्षण भर में नष्ट कर सकती है। उनका विकराल स्वरूप डराने के लिए नहीं, बल्कि भक्त को निर्भय बनाने के लिए है।

श्री काली माता की आरती हमें सिखाती है कि कभी-कभी करुणा से पहले साहस और दृढ़ता आवश्यक होती है। वे माँ हैं — जो प्रेम भी करती हैं और आवश्यकता पड़ने पर संहार भी, ताकि सत्य और धर्म की रक्षा हो सके।

जो भक्त श्रद्धा और पूर्ण समर्पण से श्री काली माता की आरती करता है, उसके जीवन से नकारात्मक शक्तियाँ दूर होती हैं और आत्मबल का जागरण होता है।जहाँ काली माता का नाम गूंजता है,वहाँ भय टिक नहीं पाता।यही श्री काली माता की आरती की दिव्य महिमा है।

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