top of page

श्री शनि देव जी की आरती

जय जय श्री शनिदेव भक्तन हितकारी।


सूरज के पुत्र प्रभु छाया महतारी॥ जय.॥


श्याम अंक वक्र दृष्ट चतुर्भुजा धारी।


नीलाम्बर धार नाथ गज की असवारी॥ जय.॥


किरीट मुकुट शीश रजित दीपत है लिलारी।


मुक्तन की माला गले शोभित बलिहारी॥ जय.॥


मोदक मिष्ठान पान चढ़त हैं सुपारी।


लोहा तिल तेल उड़द महिषी अति प्यारी॥ जय.॥


देव दनुज ऋषि मुनि सुमरिन नर नारी।


विश्वनाथ धरत ध्यान शरण हैं तुम्हारी ॥जय.॥



न्याय, धैर्य और आत्मबल का प्रकाश

जब जीवन में कठिन समय, परीक्षा और संघर्ष आते हैं, तब श्री शनि देव जी की आरती मन को धैर्य और स्थिरता प्रदान करती है। शनि देव को अक्सर भय से जोड़ा जाता है, लेकिन वास्तव में वे न्याय के देवता हैं — जो प्रत्येक व्यक्ति को उसके कर्मों के अनुसार फल देते हैं।

आरती के समय जलता हुआ दीप यह संदेश देता है कि अंधकार चाहे कितना भी गहरा क्यों न हो, सच्चे कर्म और धैर्य की रोशनी उसे काट सकती है। शनि देव का स्मरण हमें सहनशीलता, अनुशासन और आत्मसंयम का महत्व समझाता है।

श्री शनि देव जी की आरती हमें यह सिखाती है कि जीवन की हर कठिनाई दंड नहीं होती, बल्कि आत्मशुद्धि और सुधार का अवसर होती है। जो व्यक्ति सत्य और मेहनत के मार्ग पर चलता है, शनि देव अंततः उसका सहारा बनते हैं।

जो श्रद्धा और विश्वास से शनि देव की आरती करता है, उसके जीवन में स्थिरता, न्याय और आंतरिक शक्ति का संचार होता है।जहाँ शनि देव की कृपा होती है,वहाँ संघर्ष भी सफलता का मार्ग बन जाता है।यही श्री शनि देव जी की आरती की सच्ची महिमा है।

 
 
 

Comments


bottom of page