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श्री ललिता माता की आरती

Jan 5
1 min read

श्री मातेश्वरी जय त्रिपुरेश्वरी।

राजेश्वरी जय नमो नमः॥


करुणामयी सकल अघ हारिणी।

अमृत वर्षिणी नमो नमः॥

जय शरणं वरणं नमो नमः।

श्री मातेश्वरी जय त्रिपुरेश्वरी॥


अशुभ विनाशिनी, सब सुख दायिनी।

खल-दल नाशिनी नमो नमः॥

भण्डासुर वधकारिणी जय माँ।

करुणा कलिते नमो नम:॥


जय शरणं वरणं नमो नमः।

श्री मातेश्वरी जय त्रिपुरेश्वरी॥


भव भय हारिणी, कष्ट निवारिणी।

शरण गति दो नमो नमः॥

शिव भामिनी साधक मन हारिणी।

आदि शक्ति जय नमो नमः॥


जय शरणं वरणं नमो नमः।

जय त्रिपुर सुन्दरी नमो नमः॥


श्री मातेश्वरी जय त्रिपुरेश्वरी।

राजेश्वरी जय नमो नमः॥



सौंदर्य, शक्ति और चेतना का संगम

जब साधना में गहराई और जीवन में संतुलन की अनुभूति होती है, तब श्री ललिता माता की आरती आत्मा को दिव्य आनंद से भर देती है। माता ललिता केवल शक्ति का रूप नहीं, बल्कि परिपूर्ण चेतना, करुणा और सौंदर्य की साकार अभिव्यक्ति हैं।

आरती के समय जलता हुआ दीप उस तेजस्वी शक्ति का प्रतीक बन जाता है, जो अज्ञान, भय और अहंकार को शांत कर देती है। श्री ललिता माता का स्मरण हमें यह सिखाता है कि सच्ची शक्ति कोमलता और दृढ़ता — दोनों का संतुलन है।

श्री ललिता माता की आरती हमें आंतरिक जागरण का मार्ग दिखाती है। वे त्रिपुर सुंदरी हैं — जो स्थूल, सूक्ष्म और कारण तीनों स्तरों पर चेतना को प्रकाशित करती हैं। उनकी भक्ति जीवन को सौम्य, सुव्यवस्थित और अर्थपूर्ण बनाती है।

जो श्रद्धा और एकाग्रता से श्री ललिता माता की आरती करता है, उसके जीवन में शांति, आत्मविश्वास और दिव्य आकर्षण का विकास होता है।जहाँ ललिता माता की कृपा होती है,वहाँ जीवन स्वयं सुंदर बन जाता है।यही श्री ललिता माता की आरती की दिव्य महिमा है।

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